संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त ने सुप्रीम कोर्ट में सीएए मामले में दाखिल किया दखल आवेदन भारत ने कहा, आंतरिक मामले में दखल न दें

मीडीया रिपोर्ट के अनुसार संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त ने सुप्रीम कोर्ट में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) मामले में दखल आवेदन दाखिल किया है। आवेदन में सीएए के जरिए धार्मिक आधारों पर कुछ लोगों के संरक्षण दिए जाने का स्वागत किया है लेकिन मुस्लिम समुदाय के कुछ वर्गों को इससे बाहर रखने पर सवाल उठाया गया है।संयक्त राष्ट्र उच्चायुक्त माइकल बेचलेट जेरिया ने आवेदन के जरिए इस मामले में अमाइकस क्यूरी के तौर पर दखल देने की इजाजत मांगी है। आवेदन में माइकल ने कहा कि उच्चायुक्त की भूमिका अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों का संरक्षण करना है। लिहाजा उन्होंने अदालत को सहयोग देने के इरादे से आवेदन दाखिल किया है, जिससे कि अंतरराष्ट्रीय कानूनी बाध्यताओं का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।

आवेदन में कहा कि सीएए मामला प्रवासियों समेत सभी रिफ्यूजी से जुड़ा मामला है और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून व उसके मानकों के मद्देनजर इसे देखने की जरूरत है। यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट ने सीएए पर जो परीक्षण करने का निर्णय लिया है, उसमें उच्चायुक्त का भी हित जुड़ा है।

लिहाजा सुप्रीम कोर्ट को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार नियम व मानकों के आलोक में इसे देखने की जरूरत है। सभी प्रवासी कानून की नजरों में एक हैं, लिहाजा सभी को एकसमान कानूनी संरक्षण मिलना चाहिए। आवेदन में कहा गया है कि सभी प्रवासी एकसमान हैं और सभी के अधिकार समान है। उनके साथ धर्म, नागरिकता, प्रजाति आदि के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता।

आवेदन में कहा गया है कि सीएए में इस बात को नजरअंदाज कर दिया गया है कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान व बांग्लादेश में और भी कई धर्म व प्रजाति हैं जिन्हें धर्म के आधार पर प्रताड़ित किया जाता है। मसलन पाकिस्तान में अहमदिया, शिया आदि को भी प्रताड़ित किया जाता है, लेकिन सीएए में इन्हें शामिल नहीं किया गया है।

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