दोस्तों ने पहले लूटा -पीटा. फिर मरा समझकर अंधे कुएं में फेंक दिया. 96 घंटे वो लड़ता रहा जिंदगी की जंग. फिर..

आजतक के रिपोर्ट के अनुसार…

आजतक के एक इनपुट के अनुसार ओडिशा के बरगढ़ जिले के नौजवान तुलसीराम बरिहा को दोस्तों ने पहले लूटा और फिर जमकर पीटा. बाद में उसे मरा समझकर अंधे कुएं में फेंक दिया. मगर कुदरत को कुछ और ही मंजूर था. 96 घंटे बाद उस कुएं में एक रेस्क्यू ऑपरेशन किया गया. इसके बाद जो हुआ, उसने सबको हैरान कर दिया

तुलसीराम अपने कुछ दोस्तों के साथ पार्टी करने निकला था. और सभी दोस्त बीजेपुर ब्लॉक के उस सुनसान कुएं के पास गए थे. लेकिन पीने-पिलाने के बाद उसके दोस्तो ने ही तुलसीराम के साथ गद्दारी की. पहले शराब के नशे में दोस्तों ने तुलसीराम के साथ लूटपाट की और उसे बुरी तरह पीटा गया. कुछ इतना पीटा कि तुलसीराम बेहोश हो गया. यही वो वक्त था, जब गद्दार दोस्तों को लगा कि शायद तुलसीराम की मौत हो गई है. बस, इसी के बाद दोस्तों ने तुलसीराम की लाश ठिकाने लगाने के इरादे से उसे उठा कर इस सुनसान इलाके में मौजूद अंधे कुएं में फेंक दिया. एक ऐसा कुआं जिसका सालों से कोई इस्तेमाल नहीं हुआ.

कुएं में गिरने के बाद उसने पहले मदद के लिए जोर-जोर से आवाज लगाने की शुरुआत की. वो चीखा.. चिल्लाया. देर तक बचाओ-बचाओ का शोर मचाता रहा. लेकिन यहां सुनने वाला कोई नहीं था. उसकी उम्मीद की डोर बेशक टूटती जा रही थी, उसने ऊपरवाले पर आस्था की डोरी थामे रखी और लगातार भगवान को याद करता रहा. ये सिलसिला तकरीबन 96 घंटों तक यूं ही चला.

और तब पूरे चार दिनों के बाद एकाएक करिश्मा हुआ. असल में इत्तेफाक से चार दिनों के बाद एक इलाकाई शख़्स वहां जलावन के लिए लकड़ियां बटोरने पहुंचा और उसके कानों में हे भगवान, हे भगवान की आवाज पड़ी. आवाज कुएं के अंदर से आ रही थी. इसके बाद तो उसने जो कुछ देखा उसे यकीन ही नहीं हुआ. उसने देखा कि कुएं में एक नौजवान पिंडलियों तक गंदे पानी में खड़ा मदद के लिए कातर निगाहों से ऊपर ताक रहा है.

अब जल्द ही बात पहले पास के गांव तक, फिर पुलिस तक और तब रेसक्यू वर्कर्स तक जा पहुंची. अगले चंद घंटों में तुलसीराम कुएं और पानी से बाहर आ चुका था. लेकिन चार दिनों तक पानी में भूखे, प्यासे, बगैर सोए खड़े-खड़े तुलसी राम की हालत अब ऐसी हो चुकी थी कि उसे अपना ही होश नहीं था. अपने कदमों पर खड़ा होना तो दूर की बात थी.

लिहाज़ा कुएं से बाहर आते ही वो निढाल हो कर पहले जमीन पर बैठ गया और फिर लेट गया. इसके बाद उसे स्ट्रेचर के सहारे अस्पताल तक ले जाया गया. जहां उसका इलाज शुरू हुआ और उसकी जान बचाई गयी.

चार दिनों तक कीचड़ भरे गंदे पानी में डूबे उसके पैर अब इन्फेक्शन का शिकार हो चुके थे. त्रासदी ऐसी थी कि वो अपनी मर्जी से अपना हाथ तक ऊपर नहीं उठा पा रहा था.