धमनियों में क्यों चिपक जाता है बेरहम कोलेस्ट्रॉल, कब हार्ट पर आने लगती है आंच, कैसे निकले इस झंझट से, जानें सब कुछ,

Sticky Cholesterol Effects on Heart: अक्सर आपने सुना होगा कि हाई कोलेस्ट्रॉल हो गया. जब भी हाई कोलेस्ट्रॉल की बात होती है तो इसका मतलब होता है कि खून में कई तरह के कोलेस्ट्रॉल में से कुछ विलेन कोलेस्ट्रॉल की मात्रा का बढ़ना. यह कोलेस्ट्रॉल है एलडीएल यानी लो डेंसिटी लाइपोप्रोटीन. यही वो बेरहम कोलेस्ट्रॉल है जो खून की धमनियों की दीवारों पर चिपकने लगता है जिसके कारण खून का फ्लो कम हो जाता है और हार्ट खून को शरीर के सभी हिस्सों तक पहुंचाने में फोर्स से पंप नहीं कर पाता है. अगर खून सही तरीके से शरीर के अंग-अंग तक नहीं पहुंचे तो वहां ऑक्सीजन भी कम पहुंचेगी और पोषक तत्व भी कम पहुंचेगा. इस स्थिति में हार्ट अटैक, स्ट्रोक जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. तो, हमें समझना यह है कि आखिर धमनियों में यह बेरहम कोलेस्ट्रॉल चिपक क्यों जाता है.

क्या होता है बैड कोलेस्ट्रॉल
क्लीवलैंड क्लीनिक की एक रिपोर्ट में कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. आशीष सराजु कहते हैं कि कोलेस्ट्रॉल फैट का एक समूह है जिसमें कई तरह के कोलेस्ट्रॉल आते हैं. कोलेस्ट्रॉल का हेल्दी रूप हमारे लिए बहुत जरूरी है क्योंकि यह शरीर के कई महत्वपूर्ण कामों में योगदान देते हैं. एचडीएल की मात्रा अगर सही हो तो यह एचडीएल को भी कम कर देता है. इसलिए एचडीएल को गुड कोलेस्ट्रॉल भी कहा जाता है. लेकिन कुछ कोलेस्ट्रॉल हमारे लिए बहुत घातक है. इनमें से एलडीएल कोलेस्ट्रॉल प्रमुख है. इसे बैड कोलेस्ट्रॉल भी कहते है. बैड कोलेस्ट्रॉल का मॉल्यूक्यूल में सुपर ग्लू की तरह चिपचिपा पदार्थ होता है. इससे यह धमनियों की दीवारों से चिपकने लगता है. इसलिए इसे स्टिकी या चिपचिपा कोलेस्ट्रॉल भी कहते हैं.

हार्ट को कैसे पहुंचाता है नुकसान
जब खून नलिकाओं से होकर शरीर के अंग-अंग तक पहुंचता है तो यह अपने साथ कोलेस्ट्रॉल को भी ढोता है. गुड कोलेस्ट्रॉल तो इसमें आराम से पास हो जाता है लेकिन एलडीएल के अणु सुपर ग्लू से चिपका रहता है जिसके कारण जब खून धमनियों की तरफ बढ़ता है तो यह उसकी दीवार से चिपकता जाता है. जब इसकी मात्रा बढ़ जाती है तो खून को आगे पास होने में बाधा खड़ी करने लगता है. चिपकते-चिपकते यह प्लैक बन जाता है. हार्ट पर आंच आना यहीं से शुरू हो जाती है. जब प्लैक समय के साथ बढ़ता है तो धमनियों में कड़ापन आने लगती है और इसके रास्ते बहुत संकरे हो जाते हैं जिसके कारण खून को पास होने में बहुत दिक्कत होने लगती है. ऐसे में अचानक एक दिन हार्ट अटैक आ सकता है. इससे एंजाइना हो सकता है. यहां तक कि सांस लेने में तकलीफ हो सकती है. इससे दिमाग को भी खून की सप्लाई कम होने लगती है और इस कारण स्ट्रोक भी आ सकता है. बहुत अधिक प्लैक बनने पर चलने, बैठने, उठने के कारण छाती में दर्द हो सकता है.

कैसे पहचानें कि हाई कोलेस्ट्रॉल है
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. आशीष सराजु बताते हैं कि आमतौर पर जब प्लैक कम रहता है तो कोई लक्षण शरीर में दिखता ही नहीं है. लेकिन यदि आपको हाई ब्लड प्रेशर है तो इस स्थिति में कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना और खतरनाक हो सकता है. इसे साइलेंट किलर कहा जाता है. इसलिए आपको हमेशा चौकन्ना रहने की जरूरत है. इसके लिए समय-समय पर लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराने की जरूरत होती है.

हाई कोलेस्ट्रॉल को कैसे होने ही न दें
किसी भी बीमारी से बचने का सबसे बेहतर तरीका यही है कि हेल्दी डाइट लें और रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी करते रहें. फाइबरयुक्त भोजन कोलेस्ट्रॉल को बढ़ने नहीं देता है. वहीं वजन को कंट्रोल करना भी जरूरी है. इसके साथ ही सिगरेट, शराब से दूरी, तनाव मुक्त जीवन अनिवार्य है. क्रोनिक बीमारियां जैसे कि डायबिटीज या किडनी डिजीज से भी कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है. रोजाना हरी पत्तीदार सब्जियां, साबुत अनाज, ताजे फल का सेवन करें और ब्रिस्क एक्सरसाइज करें.