राजपाटः मुश्किल राह
अमित शाह ने लक्ष्य तो जरूर दे दिया, पर पश्चिम बंगाल के भाजपाई उसे देखकर हांफ रहे हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान इस सूबे में भाजपा का वोटबैंक तो जरूर बढ़ा था पर सीटें दो ही मिल पाई थीं। उसमें एक तो दार्जीलिंग की सीट ही थी जो 2009 में भी गोरखा जनमुक्ति मोर्चे की मेहरबानी से ही मिली थी। बाबुल सुप्रियो ने जरूर आसनसोल सीट जीत कर हौसला बढ़ाया था भगवा पार्टी का। लेकिन पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में फिर ध्वस्त हो गए भाजपा के मंसूबे।
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