आम आदमी का नहीं पार्टी का सरकारी जलसा, पांच साला जलसे में हावी रही आपसी लड़ाई
अजय पांडेय मंच पर सियासत की तल्खी पसरी थी तो सामने मैदान में धूल उड़ रही थी। रविवार को सूबे की पूरी सरकार मौजूद थी लेकिन जनता नदारद थी। कार्यकर्ताओं के सिर पर टोपी जरूर थी लेकिन चेहरे से जश्न का जोश नदारद था। मैदान में कुर्सियों की जगह गाड़ियों की पार्किंग की गई थी। दिल्ली में हुकूमत चला रही आम आदमी पार्टी का सियासी जलसा महज एक कोने में सिमट आया था। यकीन करना मुश्किल था कि यह दिल्ली का वही ऐतिहासिक रामलीला मैदान है जहां पांच साल पहले जब
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