कहानीः मां मुझे वापस मत भेजो
रामदरश मिश्र मुझे ससुराल वापस मत भेजो।’ उषा बार-बार मां के आगे घिघिया रही थी। ‘वे सब मुझे मार डालेंगे।’ ‘नहीं बेटी ऐसा नहीं कहते। पीहर ससुराल में तो थोड़ा फर्क होता ही है। ससुराल नई जगह होती है, नए लोगों के बीच होना होता है। तो वहां पीहर जैसा जीवन नहीं रहता। वहां कुछ नई समस्याएं झेलनी पड़ती हैं, पर धीरे-धीरे सब कुछ ठीक हो जाता है। आखिर लड़की का असली घर तो ससुराल ही है न।’ मां प्रतिभा उसे समझातीं। ‘मां तुम जैसा समझ रही हो वैसा नहीं
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