पहली बार जुर्म और बरसों से कैद जिंदगी, अब नए कानून से मिलेगी जेल से आजादी
479: बीएनएसएस की धारा 479 कहती है कि पहली बार के विचाराधीन कैदी अगर अपनी अधिकतम सजा की एक तिहाई सजा काट लेता है तो कोर्ट उसे बॉन्ड पर रिहा कर सकता है. इंडियन पीनल कोर्ट (IPC) की जगह अब भारतीय न्याय संहिता (BNSS) ने ले ली है. दावा किया गया था कि नए कानूनों (BNSS section 479( में अब इंसाफ मिलने में पहले की तुलना में कम समय लगेगा. इससे लंबित पड़े मुकदमों का बोझ भी अदालतों पर कम होगा. इससे न सिर्फ अंडरट्रायल कैदियों को राहत मिलेगी, बल्कि
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