शादीशुदा गैर मर्द से सम्बंध बनाने वाली महिला पर केस चले या नहीं, संविधान पीठ करेगी फैसला
उच्चतम न्यायालय ने व्यभिचार के अपराध से संबंधित कानूनी प्रावधान की वैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिका शुक्रवार (5 जनवरी, 2017) को पांच सदस्यीय संविधान पीठ को सौंप दी। इस कानूनी प्रावधान के अंतर्गत किसी अन्य विवाहिता से विवाहेत्तर यौन संबंधों के लिए सिर्फ पुरूष को ही दंडित किया जा सकता है। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यामयूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड की पीठ का पहली नजर में यह मानना था कि हालांकि आपराधिक न्याय व्यवस्था ‘लैंगक निरपक्षता’ की अवधारणा पर आधारित है लेकिन व्यभिचार के अपराध से
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