Mirza Ghalib: जानिए कौन हैं मिर्ज़ा ग़ालिब, बादशाह जफर से मिली थी “दबीर-उल-मुल्क” की उपाधि
‘होगा कोई ऐसा कि मिर्ज़ा ग़ालिब को ना जाने?’ इस शेर से मिर्ज़ा ग़ालिब ने बरसों पहले अपने आप को बहुत खूब बयां किया था और आज यानि बुधवार को उनकी 220वीं सालगिरह के मौके पर भी यह शेर उतना ही प्रासंगिक है। शेर-ओ-शायरी के सरताज कहे जाने वाले और उर्दू को आम जन की जुबां बनाने वाले मिर्ज़ा ग़ालिब के जन्मदिवस के अवसर पर गूगल ने उनके सम्मान में डूडल बनाकर उन्हें याद किया है। मिर्ज़ा ग़ालिब की प्रथम भाषा उर्दू थी लेकिन उन्होंने उर्दू और फारसी भाषाओं में
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