‘वैचारिक आतंक के खिलाफ प्रतिरोध की आवाज तेज है’
आठ साल तक हिंदी-अंग्रेजी शब्दकोश तैयार करने की धुन में कैदी की तरह जीवन बिताया और जब मुख्यधारा में शामिल हुए तो असहिष्णुता के खिलाफ प्रतिरोध की आवाज उठनी शुरू हो गई थी। हैदराबाद के इंग्लिश एंड फॉरेन विश्वविद्यालय के पहले (अब पूर्व) कुलपति व रूसी भाषा के विद्वान अभय मोर्य कहते हैं कि प्रतिगामी शक्तियां ज्यादा दिनों तक अंधेरा कायम नहीं रख सकती हैं। गौरी लंकेश की हत्या के बाद के भारत और साहित्यिक माहौल में पसरी बेचैनी पर उनसे पांच सवाल। सवाल :हर तरह का दौर होता है।
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