राजनीतिक पार्टियों, धर्म-गुरुओं और श्रद्धालुओं के बीच एक मौन-सहमति
विकृत श्रद्धा भारत के भीड़ तंत्र खास तौर पर अपने गुरुओं पर अपार आस्था रखने वाले श्रद्धालुओं की मानसिकता की थाह लेना आसान नहीं है। पता नहीं यह सबक इन श्रद्धालुओं ने कहां से सीख लिया है कि दुष्कर्म करने वाले और कानून द्वारा घोषित अपराधी के पक्ष में खड़े हो जाओ, आगजनी और उपद्रव करो और सत्ता को चुनौती दो! भर्त्सना अथवा निंदा करने के बजाय अपराधी के पक्ष में उतरो और सामाजिक मूल्यों और न्याय-प्रक्रिया की धज्जियां उड़ाओ! लोगों के इस अविवेकपूर्ण रवैये को देख हमारी अदालतों का
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