रात में बिना टॉयलेट किए सोने की कभी न करें गलती, वरना जिंदगी भर लगेंगे अस्पताल के चक्कर

रात में सोने से पहले ज्यादातर लोग टॉयलेट जाते ही है. लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो यह काम नहीं करते हैं. ऐसे लोगों के सेहत पर क्या असर पड़ता है इसी पर बात करेंगे.

ज्यादातर लोग रात में सोने से पहले एक बार बाथरूम जरूर जाते हैं. लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो नहीं जाते हैं उन लोगों के लिए हम यह खास तरह की न्यूज लेकर आए हैं. जो लोग सोने से पहले बाथरूम नहीं जाते हैं उनके शरीर में पर क्या असर पड़ता है? आइए जानें.

आखिर क्यों रात में सोने से पहले टॉयलेट करना है जरूरी?

आप दिन में खूब पानी पीते हैं. जो जितना पानी पीता है उसके शरीर से उतनी ही ज्यादा गंदगी बाहर निकल जाती है. जब कोई व्यक्ति टॉयलेट करता है तो उसके शरीर से टॉयलेट के जरिए गंदगी बाहर निकल जाती है. लेकिन अगर आप रात के वक्त टॉयलेट नहीं करते हैं तो काफी देर तक गंदगी पेट में रह जाती है. जिसके कारण कई सारी इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है. 

रात के वक्त टॉयलेट नहीं करते हैं तो सांस लेने, पाचन संबंधी दिक्कतें हो सकती है. टॉयलेट को ज्यादा देर तक ब्लॉडर में नहीं रखनी चाहिए. इसके कारण ब्लाडर और दिमाग दोनों काफी ज्यादा डिस्टर्ब हो जाता है. सोने से पहले ज्यादा पानी न पिएं. अगर पीते भी हैं तो टॉयलेट करने के बाद ही सोएं क्योंकि टॉयलेट को पेट में रखने से कई तरह की समस्याएं शुरू हो सकती है. 

हेल्थलाइन में छपी खबर एक रिपोर्ट के मुताबिक दिमाग और ब्लाडर में क्या कनेक्शन है और यह किस तरह से काम करता है. इस पर बात करेंगे. 

गॉल ब्लाडर और दिमाग किस तरह से काम करता है?

गॉल ब्लाडर दो तरह से काम करता है. अगर इसमें टॉयलेट भर जाता है तो उसे ठीक ढंग से खाली करना चाहिए. जैसे ही ब्लॉडर में टॉयलेट भरता है तो दिमाग सिग्नल देता है कि उसे खाली कर देना चाहिए. 

आमतौर पर अमेरिका में 3 या 4 साल की उम्र में होता है. बच्चे सीखते हैं कि स्वेच्छा से शौचालय का उपयोग कैसे किया जाए. इसका मतलब यह है कि जब मूत्राशय भर रहा है तो वे महसूस कर सकते हैं और उनका मस्तिष्क उस संकेत को प्राप्त और समझ सकता है. 

स्लीप मोड में क्या होता है?

अधिकांश बच्चे दिन में काफी ज्यादा बाथरूम का इस्तेमाल करते हैं. वहीं अगर आप रात में सोने से पहले बाथरूम नहीं जाते हैं तो आपका दिमाग सिग्नल देता है. जिसके कारण आपकी नींद भी खराब हो सकती है. 

अगर कोई तेज़ आवाज़ या तेज़ रोशनी होती है तो शरीर इसे महसूस करता है और रिएक्ट करता है. लेकिन नींद के दौरान, शरीर शायद वह शोर नहीं सुन पाता क्योंकि नींद की अवस्था में होती है. कल्पना कीजिए कि आपको टॉयलेट लगी है लेकिन लेकिन आप पूरी रात उसे रोके हुए है. इसके कारण आपका दिमाग भी काफी ज्यादा डिस्टर्ब हो सकता है.  खबर एबीपी