वक्त की नब्ज- खौफ का साया
फिर लौट कर आई है आज वह मनहूस बरसी और फिर वही सवाल हम पूछने पर मजबूर हैं, जो हम पूछते आए हैं 26 नवंबर, 2008 के बाद, जब भी यह बरसी लौट कर आई है। एक दशक गुजर जाने के बाद भी सवाल बहुत सारे हैं और जवाब बहुत थोड़े। पाकिस्तान के सैनिक शासक जानते हैं कि हम लाचार हैं, सो इस बरसी के दो दिन पहले हाफिज सईद को लाहौर की एक अदालत ने रिहा किया इस आधार पर कि उसके खिलाफ ठोस सबूत पेश नहीं हुए हैं
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