पब्‍ल‍िक पर भारी VIP: 3 जवान कर रहे एक वीआईपी की सुरक्षा, जबक‍ि 663 आम लोगों पर एक

देश में वीआईपी कल्चर आज भी आम लोगों पर भारी पड़ती नजर आ रही हैं। हालांकि, देश के नेता वीआईपी कल्चर खत्म करने का वादा करते हैं, लेकिन असलियत कुछ और ही है। सामने आए ताजा आंकड़ों के मुताबिक देश के करीब 20 हजार वीआईपी लोगों की सुरक्षा के लिए प्रत्येक के लिए 3 पुलिसकर्मी तैनात हैं। जबकि आम लोगों के लिए तैनात पुलिसकर्मियों की संख्या बहुत कम है। ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डवलपमेंट के आंकडों के मुताबिक पूरे देश में 19.26 लाख पुलिस अधिकारी हैं, जिनमें से 56,944

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हिमालय की पीर

हिमालय आकार में जितना विराट है, अपनी विशेषताओं के कारण उतना ही अद्भुत भी। कल्पना करें कि अगर हिमालय न होता तो दुनिया और खासकर एशिया का राजनीतिक भूगोल क्या होता? एशिया का ऋतुचक्र क्या होता? किस तरह की जनसांख्यकी होती और किस तरह के शासनतंत्रों में बंधे कितने देश होते? विश्वविजय के जुनून में दुनिया के आक्रांता भारत को किस कदर रौंदते? न गंगा होती, न सिंधु होती और न ही ब्रह्मपुत्र जैसी महानदियां होतीं। फिर तो संसार की महानतम संस्कृतियों में से एक सिंधु घाटी की सभ्यता भी

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जानिए क्यों Samuel Johnson को कहा जाता था “फादर ऑफ द मॉडर्न डिक्शनरी”

सैम्यूअल जॉनसन का जन्म 18 सितंबर, 1709 को इंग्लैंड के लंदन में हुआ था।सैम्यूअल जॉनसन को लोग अक्सर प्यार से डॉक्टर जॉनसन और फादर ऑफ द मॉडर्न डिक्शनरी के नाम से बुलाना पसंद करते थे। एक कवि, निबंधकार, नैतिकतावादी, साहित्यकार आलोचक, जीवनीकार, संपादक और शब्दालेखक के रूप में जॉनसन का इंग्लिश लिट्रेचर में काफी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। 1750 में जॉनसन ने व्यापक अंग्रेजी डिक्शनरी का निर्माण किया था जिसे 1755 में पब्लिश किया गया था। इसी कारण उन्हें फादर ऑफ द मॉडर्न डिक्शनरी कहा जाता था। यह पहली ऐसी डिक्शनरी

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PHOTOS: जाते-जाते अपने पीछे ये यादें छोड़ गए एयरफोर्स के इकलौते फाइव स्टार मार्शल अर्जन सिंह

भारतीय वायु सेना के मार्शल अर्जन सिंह का 98 साल की उम्र में 16 सितंबर को निधन हो गया है। एयरफोर्स फाइव स्टार रैंक वाले मार्शल सिंह एकलौते ऑफीसर थे। जैसा सेना का अनुशासन उनके अंदर भरा था वैसे अब तक शायद किसी सेनानायक में न हो। भारत 1965 के युद्ध में मार्शल अर्जन सिंह का शानदार नेतृत्व कभी नहीं भूलेगा, वह हमेशा याद आएंगे। सिंह भले ही इस दुनिया से रुक्शत हो गए हैं लेकिन वे अपने पीछे न जाने कितनी ही यादें छोड़ गए हैं। देखिए सिंह की

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मकबूल फिदा हुसेन

एमएफ हुसेन- जन्म: 17 सितंबर 1915 निधन: 9 जून 2011 दुनिया के महान चित्रकारों में से एक थे मकबूल फिदा हुसेन। वे एमएफ हुसेन के नाम से मशहूर हैं। ‘भारत का पिकासो’ कहे जाने वाले हुसेन का जन्म 17 सितंबर, 1915 को महाराष्ट्र के पंढरपुर गांव में एक सुलेमानी बोहरा परिवार में हुआ था। यह परिवार मूल रूप से गुजरात का रहना वाला था। हुसेन के बचपन में ही उनकी मां चल बसी थीं। इसके बाद उनके पिता इंदौर चले गए। वहीं हुसेन की प्रारंभिक शिक्षा हुई। बड़ोदरा में एक

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कहानीः मां मुझे वापस मत भेजो

रामदरश मिश्र मुझे ससुराल वापस मत भेजो।’ उषा बार-बार मां के आगे घिघिया रही थी। ‘वे सब मुझे मार डालेंगे।’ ‘नहीं बेटी ऐसा नहीं कहते। पीहर ससुराल में तो थोड़ा फर्क होता ही है। ससुराल नई जगह होती है, नए लोगों के बीच होना होता है। तो वहां पीहर जैसा जीवन नहीं रहता। वहां कुछ नई समस्याएं झेलनी पड़ती हैं, पर धीरे-धीरे सब कुछ ठीक हो जाता है। आखिर लड़की का असली घर तो ससुराल ही है न।’ मां प्रतिभा उसे समझातीं। ‘मां तुम जैसा समझ रही हो वैसा नहीं

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भविष्य की भाषा

हिंदी के बारे में या उसके विरोध में जब भी कोई हलचल होती है, तो राजनीति का मुखौटा ओढ़े रहने वाले भाषा-व्यवसायी बेनकाब होने लगते हैं। उनकी बेचैनी समझ में तो आती है, पर हंसी इस बात पर आती है कि संविधान का नाम बार-बार रटने और संविधान की कसम खाने के बाद भी यह गोलबंदी या अविश्वास का माहौल बनता क्यों है। यहां हम केवल एक ही प्रावधान को याद करें। संविधान के अनुच्छेद 351 में हिंदी भाषा के विकास के लिए निर्देश देते हुए स्पष्ट कहा गया है

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दिल ढूंड़ता है…

करीब एक दशक पहले तक लगभग सभी बड़े शहरों में साहित्यकारों, संस्कृतिकर्मियों के बैठने के अड्डे हुआ करते थे, जहां वे शाम को या फुरसत के क्षणों में बैठ कर देश-दुनिया के तमाम मसलों पर बहसते-बतियाते, कुछ नया रचने की ऊर्जा पाते रहते थे। इन अड्डों में टी हाउस और कॉफी हाउस प्रमुख थे। मगर अब वे अड्डे उजड़ते गए हैं। अब नए रचनाकार, संस्कृतिकर्मी इन अड्डों का रुख नहीं करते। इनकी जगह अब जो नए अड्डे बन रहे हैं या बन गए हैं, उनकी आबो-हवा अलग है। वहां कॉफी हाउस

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अखिल भारतीय संदेश- दीवार पर इबारत

रोहतक के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में प्रधानमंत्री के भाषण के सीधे प्रसारण के लिए टांगे गए प्रोजेक्टर पर ‘बापू सेहत के लिए तू तो हानिकारक है’ चलाना पड़ गया। जेएनयू से लेकर रामजस तक ‘आजादी’ शब्द का आपने इतना कुपाठ किया कि पंजाब, राजस्थान, असम और त्रिपुरा से लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से आजादी के नारे लगे। अब हम यह अतिपाठ तो नहीं करेंगे कि युवाओं के इस रुझान का असर 2019 पर भी पड़ेगा लेकिन यह आगाह जरूर करेंगे कि युवा गढ़ों की दीवार पर

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World Ozone Day 2017: ‘सूर्य से पलने वाले जीवन की रक्षा’ थीम पर मनाया जा रहा ओजोन दिवस

16 सितंबर। आज दुनिया भर में ओजोन दिवस मनाया जा रहा है। यह लोगों को ओजोन परत के बारे में जागरूक करने के लिए मनाया जाता है। इस साल विश्व ओजोन दिवस का थीम ‘सूर्य से पलने वाले जीवन की रक्षा’ रखा गया है। यह दिन ओजोन लेयर तोड़ने वाले पदार्थों के मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर दस्तखत करने की तारीख को याद दिलाता है। आज (16 सितंबर) इसकी 30वीं सालगिरह है। इसकी 30 वीं सालगिरह से पहले ओजोन सेक्रेट्रिएट ने #OzoneHeroes करके एक कैंपेन भी चलाया है। साल 1994 में संयुक्त राष्ट्र

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नरेंद्र मोदी सरकार चाहे तो 38 रुपए लीटर मिल सकता है पेट्रोल, पर बड़ा सवाल- चाहेगी क्या?

नरेंद्र मोदी सरकार पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर आलोचनाओं से घिरी हुई है। वहीं पेट्रोलियम मंत्री ने धर्मेंद्र प्रधान ने यह कहकर वित्त मंत्री अरुण जेटली के पाले में गेंद डाल दी है कि पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत तभी तार्किक हो सकती है जब उन्हें वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाया जाए। केंद्र सरकार ने एक जुलाई को देश में सभी अप्रत्यक्ष करों की जगह जीएसटी लागू किया था लेकिन पेट्रोलियम उत्पादों को अभी इससे बाहर रखा गया है। पिछले एक महीने में पेट्रोल की कीमत में सात

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तर्क नहीं तुर्रा

भारत में जब भी बुलेट ट्रेन की बात होती है कुछ लोगों द्वारा एक थका राग छेड़ दिया जाता है कि पहले भारतीय रेल ठीक कर दो, उसके बाद बुलेट ट्रेन चलाना! यह तर्क नहीं तुर्रा है! इस तुर्रे से ग्रस्त गांव का गरीब अपने बच्चों को बताता है कि नए कपड़े पहनना अमीरों का काम है, उसकी जिंदगी का सरोकार तो फटे-पुराने या पैबंद लगे वस्त्रों से ही है। इस तुर्रे से ग्रस्त करोड़ों लोग दशकों तक यही सोचते रहे कि उनकी प्राथमिकता बच्चे का पेट भरना है न

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सहयोग का सफर

जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के भारत दौरे में सबसे ज्यादा चर्चा बेशक बुलेट ट्रेन के शिलान्यास की हो रही हो, लेकिन दोनों देशों के बीच जिस तरह कई अन्य पहलुओं पर बातचीत और सहयोग की संभावना बनी है, उसका महत्त्व बहुत ज्यादा है। खासतौर पर द्विपक्षीय संबंध, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों के साथ-साथ आतंकवाद से निपटने के मसले पर दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच भविष्य में बेहतर परस्पर सहयोग की जमीन बनी है। हाल के दिनों में अल-कायदा, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों और उनके पाकिस्तानी

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महंगाई की मार

वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी लगाने के पीछे तर्क रहा है कि इससे वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें घटेंगी। मगर इसके शुरुआती चरण में ही महंगाई पिछले पांच महीने के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। हालांकि अनेक आम उपभोक्ता वस्तुओं पर करों की दर काफी कम रखी गई है, इसके बावजूद खुदरा बाजार में वस्तुओं की कीमतें बढ़ी हैं, तो इसकी वजहों पर ध्यान देने की जरूरत है। कहा जा रहा है कि जीएसटी का शुरुआती चरण होने की वजह से बहुत सारे खुदरा कारोबारी भ्रम में हैं और

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हिन्दी दिवस 2017: अगर आपको भी देना है भाषण तो ऐसे करें तैयारी, जीतें इनाम और तालियां

पूरे देश में हर साल 14 सितंबर को हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है। पहली बार 1953 में इस दिन हिन्दी दिवस मनाया गया था। इस विशेष दिन पर हिन्दी दिवस मनाने के पीछे एक खास वजह है। इसी दिन 14 सितंबर 1949 को भारत की संविधान सभा में देवनागरी लिपि में लिखी हिन्दी को देश की आधिकारिक भाषा के रूप में स्वीकार किया गया था। संविधान सभा ने ही देश का संविधान बनाया है। उस समय व्यवस्था थी कि हिन्दी के साथ ही अगले 15 सालों तक अंग्रेजी

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