अपने ही आंगन में पराए

रोहिंग्या मुसलिमों की दशा एक बार फिर दुनिया भर में चर्चा का विषय है। रोहिंग्या लोग बरसों से म्यांमा की सेना के अत्याचारों के शिकार रहे हैं। म्यांमा सेना ने सैकड़ों रोहिंग्या मुस्लिमों को मौत के घाट उतार दिया तो भारी संख्या में इस समुदाय के लोग म्यांमा छोड़ कर अपनी जान बचाने के लिए बांग्लादेश और थाईलैंड में पनाह मांगने को मजबूर हो रहे हैं। ये लोग शरणार्थी शिविरों में नारकीय जिंदगी जीने को विवश हैं। म्यांमा सरकार इन्हें अपना नागरिक नहीं मानती है और समय-समय पर इनका दमन

» Read more

विवाद में संबोधन

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अमेरिका के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में व्याख्यान देते हुए जो भी कहा उसमें कुछ भी ऐसा नहीं है जो विपक्ष के एक नेता को नहीं कहना चाहिए। फिर भी उनके इस भाषण को लेकर कुछ विवाद उठ गया है। खासकर भारतीय जनता पार्टी ने इस पर तीखा एतराज जताया है। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने तो बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राहुल गांधी के भाषण की कड़ी आलोचना की है। साथ ही भाजपा के कई और नेताओं ने भी कैलिफोर्निया में दिए राहुल के भाषण को लेकर

» Read more

हिन्दी दिवस 2017: जानिए 14 सितंबर को ही क्यों मनाते हैं हिन्दी दिवस?

पूरे देश में हर साल 14 सितंबर को हिन्दी दिवस मनाया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दिन ही हिन्दी दिवस क्यों मनाया जाता है? जब साल 1947 में देश आजाद हुआ तो देश के सामने भाषा का सवाल एक बड़ा सवाल था। भारत जैसे विशाल देश में सैकड़ों भाषाएं और हजारों बोलियां थीं। छह दिसंबर 1946 को आजाद भारत का संविधान तैयार करने के लिए संविधान सभा का गठन हुआ। संविधान सभा के अंतरिम अध्यक्ष सच्चिदानंद सिन्हा बनाए गए। बाद में इसके डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को इसका

» Read more

विज्ञान बनाम दृष्टि

हाल ही में इसरो यानी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन का एक अंतरिक्ष यान प्रक्षेपण नाकाम हो गया क्योंकि वह ‘हीट शील्ड’ में फंस गया था। इस पर सोशल मीडिया पर आई कई प्रतिक्रियाओं के बीच एक मजाकिया टिप्पणी ने मुझे चौंकाया जिसमें कहा गया था कि ‘इसरो ने इस बार प्रक्षेपण के दौरान नारियल नहीं फोड़ा होगा, इसलिए यह असफल रहा!’ बेशक यह टिप्पणी व्यंग्यात्मक थी, लेकिन इसी संदर्भ में मुझे अंतरिक्ष यानों के प्रक्षेपण से पहले किए गए हवन की तस्वीरें याद आर्इं। इसमें बाकायदा इसरो के उच्च स्तर

» Read more

गरीबों की गाढ़ी कमाई लूट रहे हैं सरकारी बैंक, अकेले स्टेट बैंक ने एक तिमाही में वसूले 235 करोड़

बचत खातों में न्यूनतम जरूरी रकम रखने के प्रावधान की आड़ में सरकारी बैंक गरीबों की खून-पसीने की कमाई पर डाका डाल रहे हैं। अकेले भारतीय स्टेट बैंक ने एक अप्रैल से 30 जून तक की तिमाही के दौरान इस मद में अपने खाता धारकों से 235 करोड़ रुपए की कमाई कर ली। बाकी बैंक भी इसी राह पर हैं। भारतीय स्टेट बैंक के बचत खाताधारक के लिए अपने खाते में हर समय न्यूनतम पांच हजार रुपए की रकम जमा रखना जरूरी है। चालू वित्तीय वर्ष की शुरुआत से ही

» Read more

असहमति से खौफ

केंद्र सरकार के चौथे साल की शुरुआत और चौथी हत्या। कलबुर्गी, दाभोलकर, पानसरे और फिर गौरी लंकेश। ये सब सत्ताधारी वर्ग और कट्टरपंथी ताकतों को असहज कर देने वाले मौलिक प्रश्न उठा रहे थे। हो सकता है कि उनके विचारों से हमारी सहमति नहीं हो, लेकिन लोकतांत्रिक ढांचे में अगर असहमत स्वर को बंदूक के बल पर चुप करा दिया जाएगा तो स्पष्ट है कि लोकतंत्र की हत्या हो रही है और अराजक तत्त्व हावी हैं। यह घटना देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक चुनौती है। इन परिस्थितियों में

» Read more

प्रधानमंत्री का नया जोशीला नारा ‘करेंगे और करके रहेंगे’ महज एक नारा बन कर न रह जाए

भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वर्ष पूरे होने पर प्रधानमंत्री ने युवा वर्ग का आह्वान करते हुए कहा था कि आज कई समस्याओं, मसलन गरीबी, कुपोषण, जातिवाद को भारत छोड़ने के लिए बाध्य करना है। इस अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम ‘संकल्प से सिद्धि’ की घोषणा भी की गई। ऐसी उम्मीद की गई कि अगर हम आज उपरोक्त समस्याओं को दूर करने का संकल्प लें तो 2022 में भारत इनसे आजाद हो जाएगा। जैसे 1942 के ठीक 5 वर्ष बाद 1947 में भारत को ब्रिटिश शासन से आजादी मिल गई

» Read more

कैसे रुकेंगे सड़क हादसे

अब कोई दिन नहीं गुजरता जिस दिन देश के किसी भाग में सड़क हादसा न हो। पिछले साल औसतन एक घंटे में पचपन सड़क दुर्घटनाएं हुर्इं जिनमें सत्रह लोगों की मौत हुई। यह जानकारी पिछले दिनों जारी एक सरकारी रिपोर्ट में सामने आई है। हालांकि कुल मिलाकर सड़क हादसों में 4.1 प्रतिशत की गिरावट आई है लेकिन मृत्यु-दर में 3.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। सड़कों पर औसतन रोजाना चार सौ लोग मारे जाते हैं। भारत में पिछले साल कुल 4,80,652 सड़क दुर्घटनाएं हुर्इं, जिनमें 1,50,785 लोगों की जान गई

» Read more

लोहिया को ठेंगा

नीतीश कुमार जो चाहते थे वही कर लिया। शरद यादव को अपनी पार्टी जनता दल (एकी) में दरकिनार कर दिया। शरद यादव के कद का दूसरा कोई नेता था ही नहीं। लिहाजा अब पार्टी पूरी तरह नीतीश की मुट्ठी में है। पार्टी को जैसे चाहें चला सकते हैं। किसी की चूं करने की भी मजाल नहीं होगी। यों वरिष्ठ नेता और भी कई हैं। पर अब तो सब बौने हो गए हैं। अगर नीतीश का संकेत नहीं समझेंगे तो न जाने किस गति को प्राप्त हो जाएं। एक तरह से

» Read more

निजता है व्यक्तिगत आजादी का मूलाधार

पी. चिदंबरम भारत की अदालतें अपने दिए फैसलों में हमेशा संबंधित पक्षों के वकीलों द्वारा पेश की गई दलीलों को दर्ज करती हैं। (न्यायमूर्ति केएस पुत्तस्वामी द्वारा दायर) निजता वाले मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने 24 अगस्त, 2017 को फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति नरीमन ने अपने दिए फैसले में पैराग्राफ 6 से 10 तक दलीलों को दर्ज किया है। मैं उस फैसले के पैराग्राफ 6 से कुछ उद्धृत करना चाहूंगा: ‘‘6. भारत सरकार की तरफ से पेश हुए, देश के विद्वान महाधिवक्ता श्री केके वेणुगोपाल का तर्क था कि आठ जजों

» Read more

बहुसंख्यकवाद का रास्ता

उन्नीस सौ चौरासी के चुनाव परिणामों ने राजीव गांधी को भी चौंका दिया था। उनकी मां और भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तीस अक्तूबर को अपने ही सुरक्षाकर्मियों द्वारा हत्या कर दी गई थी और उसके बाद भीषण सिख-विरोधी दंगे हुए थे। यों तो हालात देर-सबेर काबू में आ गए थे, पर इंदिरा गांधी की हत्या पर गुस्सा फिर भी दहक रहा था। दिसंबर के आखिरी दिनों में वोट पड़े थे और राजीव गांधी के नेतृत्व की कांग्रेस ने सबका सूपड़ा साफ कर दिया था। 533 सीटों की लोकसभा

» Read more

भविष्य तलाशती नौटंकी

नौटंकी हमारे देश की प्राचीन लोक कलाओं में शुमार है। ग्रामीण संस्कृति में यह न सिर्फ मनोरंजन, बल्कि अनेक ज्वलंत समस्याओं को उजागर करने का सशक्त माध्यम भी रही है। नौटंकी से प्रेरणा लेकर हिंदी फिल्मों ने अनेक प्रयोग किए। रंगमंच के लिए नौटंकी के कलाकार कई रूपों में चुनौती पेश करते रहे हैं। मगर संचार माध्यमों और मनोरंजन के आधुनिक संसाधनों के विकास के चलते आज नौटंकी का अस्तित्व संकट में नजर आने लगा है।ं हालांकि रंगमंच से जुड़े लोगों का मानना है कि नौटंकी में अद्भुत ताकत है,

» Read more

कलम के विरुद्ध

पत्रकार लोगों को खबरें देते-देते कब खुद खबर बन जाते हैं, पता ही नहीं चलता है। बंगलुरु में पांच सितंबर को वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की गोली मारकर हत्या की गई। उन्होंने अपनी कन्नड़ साप्ताहिक पत्रिका में पिछले तीन महीनों में केंद्र सरकार और उसके नेताओं की आलोचना में कम से कम आठ लेख प्रकाशित किए थे। लंकेश ने अपने आखिरी साप्ताहिक स्तंभ में गोरखपुर के बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में बच्चों की मौत और डॉक्टर कफील खान को हटाए जाने के खिलाफ लिखा था। इससे पहले एमएम

» Read more

बेपटरी रेल

हाल में हुए रेल हादसों से लोग अभी उबर नहीं पाए थे कि एक बार फिर रेल परिचालन और यात्री सुरक्षा की कड़वी हकीकत सामने आ गई। गुरुवार को, यानी एक ही दिन में, ट्रेन के पटरी से उतरने के कई वाकये हुए। हालांकि इन घटनाओं में किसी की जान नहीं गई, बस कुछ यात्री मामूली रूप से घायल हुए, पर इससे जो हुआ उसकी गंभीरता कम नहीं हो जाती। इन घटनाओं से भारतीय रेलवे की खस्ता ढांचागत हालत और परिचालन में लापरवाही सामने आई है, और यही अधिकतर हादसों

» Read more

अबू सलेम को सजा द‍िलवाने वाले उज्‍ज्वल न‍िकम द‍िलवा चुके हैं 37 को फांसी, 628 को उम्रकैद

मुंबई और देशभर के न्यायिक व्यवस्था में उज्ज्वल निकम एक ऐसे शख्स का नाम है जिन्हें आतंकवाद से जुड़े मामलों का मास्टर माना जाता है। 1993 के सिलसिलेवार बम धमाकों से जुड़े मामलों की सुनवाई 24 साल तक चली। इसके गुनहगारों को भी टाडा अदालत से फांसी और उम्रकैद दिलाने में सरकारी वकील उज्ज्वल निकम की अहम भूमिका रही। गैंगस्टर अबू सलेम और करीमुल्लाह खान को अदालत ने उम्रकैद सुनाई है जबकि ताहिर मर्चेंट और फिरोज राशिद खान को फांसी की सजा सुनाई है। इनके अलावा रियाज सिद्दीकी को 10

» Read more
1 5 6 7 8 9 10