Atal Bihari Vajpayee: वाजपेयी के सफर का गवाह अवध
रुमी दरवाजे के उस पार जो पुराना अवध बसता है, वहां से लेकर नए शहर लखनऊ तक अटल जी के चाहने वाले मौजूद हैं। कोई मिठाई वाला है तो कोई चाय या खाने का होटल चलाने वाला। कभी न कभी अटल जी से इस शहर के सैकड़ों दुकानदारों का साबका पड़ा। वे जिससे भी मिले, उसे खुद में समाहित करते गए। बल्कि यों कहें तो लोग खुद-ब-खुद उनकी तरफ खिंचते चले गए। पहले चाहने वालों की तादाद इकाई और दहाई तक थी। यह कब सैकड़ा, हजार का आंकड़ा पार कर
» Read more